यथार्थवाद बनाम आदर्शवाद: दुनिया वैसी नहीं है जैसी आप सोचते हैं

हम एक ऐसी दुनिया में पले-बढ़े हैं जहाँ हमें सिखाया जाता है कि “हमेशा सच बोलो,” “अच्छे के साथ अच्छा होता है,” और “ईमानदारी ही सर्वोत्तम नीति है।” ये आदर्शवाद (Idealism) के स्तंभ हैं। लेकिन जब हम वास्तविक दुनिया (Professional world) में कदम रखते हैं, तो हमारा सामना विश्वासघात, ऑफिस पॉलिटिक्स और स्वार्थ से होता है। यहाँ हमारा आदर्शवाद टूटकर बिखर जाता है।

निकोलो मैकियावेली वह व्यक्ति था जिसने दुनिया को एक अलग चश्मा पहनना सिखाया—यथार्थवाद (Realism) का चश्मा। उसने कहा कि यदि आप उस दुनिया के पीछे भागेंगे जो ‘होनी चाहिए’, तो आप उस दुनिया में नष्ट हो जाएंगे जो वास्तव में है।


1. आदर्शवाद की सुंदर जेल

आदर्शवाद हमें बताता है कि दुनिया को कैसा होना चाहिए। यह नैतिक रूप से सही है, लेकिन व्यावहारिक रूप से खतरनाक हो सकता है।

  • आदर्शवादी सोच: “अगर मैं अपनी टीम के साथ बहुत अच्छा व्यवहार करूँगा, तो वे कभी मेरा साथ नहीं छोड़ेंगे।”
  • यथार्थवादी सच: लोग अक्सर अपने व्यक्तिगत लाभ और सुरक्षा के आधार पर निर्णय लेते हैं। आपकी अच्छाई उनकी वफादारी की गारंटी नहीं है।

मैकियावेली का तर्क था कि जो व्यक्ति हर समय ‘अच्छा’ बनने का नाटक करता है, वह उन लोगों के बीच बर्बाद हो जाता है जो अच्छे नहीं हैं।


2. यथार्थवाद क्या है? (दुनिया को उसकी नग्नता में देखना)

यथार्थवाद का अर्थ क्रूर होना नहीं है; इसका अर्थ सजग (Aware) होना है। मैकियावेली के अनुसार, मनुष्य स्वभाव से चंचल, कृतघ्न और लालची होते हैं। एक यथार्थवादी व्यक्ति इस तथ्य से दुखी होने के बजाय इसे एक ‘डेटा पॉइंट’ की तरह इस्तेमाल करता है।

यथार्थवादी नजरिया आपको मजबूत कैसे बनाता है?

  1. अपेक्षाओं का प्रबंधन (Managing Expectations): जब आप जानते हैं कि लोग स्वार्थी हो सकते हैं, तो उनके विश्वासघात से आपको गहरा सदमा नहीं लगता। आप मानसिक रूप से पहले से तैयार रहते हैं।
  2. बेहतर निर्णय लेना: आप भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेते हैं।
  3. शक्ति का सही आकलन: आप यह नहीं देखते कि सामने वाला क्या ‘कह’ रहा है, आप यह देखते हैं कि उसका ‘स्वार्थ’ (Interest) कहाँ है।

3. “इरादे” नहीं, “परिणाम” मायने रखते हैं

आदर्शवादी लोग अक्सर ‘अच्छे इरादों’ की दुहाई देते हैं, लेकिन मैकियावेली का मानना था कि राजनीति और करियर में केवल परिणाम (Outcomes) गिने जाते हैं।

  • उदाहरण: एक मैनेजर जो बहुत दयालु है लेकिन उसकी टीम प्रोजेक्ट फेल कर देती है, वह अंततः कंपनी के लिए नुकसानदेह है। वहीं, एक सख्त मैनेजर जो परिणाम सुनिश्चित करता है, वह संगठन को जीवित रखता है।

यथार्थवाद हमें सिखाता है कि क्षमता (Competence) दयालुता से अधिक महत्वपूर्ण है जब अस्तित्व (Survival) दांव पर लगा हो।


4. मानसिक मजबूती के लिए मैकियावेली के 3 सूत्र

क. दुनिया को ‘फिल्टर’ के बिना देखें

भावुक होना बंद करें। यदि आपके ऑफिस में कोई आपकी बुराई कर रहा है, तो यह न पूछें “वह ऐसा कैसे कर सकता है?” बल्कि यह पूछें “उसे ऐसा करने से क्या लाभ मिल रहा है?” जब आप ‘क्यों’ को समझ लेते हैं, तो आप ‘कैसे निपटें’ जान जाते हैं।

ख. अपनी सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित करें

मैकियावेली ने कहा था, “सशस्त्र भविष्यवक्ता जीतते हैं, निहत्थे मारे जाते हैं।” अपनी स्किल्स, अपने नेटवर्क और अपने संसाधनों को इतना मजबूत रखें कि आपको किसी की ‘दया’ पर निर्भर न रहना पड़े।

ग. नैतिकता और बुद्धिमत्ता का संतुलन

यथार्थवादी होने का मतलब ‘बुरा’ होना नहीं है। इसका मतलब है कि जब दुनिया आपके साथ अच्छा व्यवहार करे, तो आप अच्छे रहें, लेकिन जब वह आपके खिलाफ हो, तो आपके पास लड़ने के लिए हथियार (रणनीति) तैयार हों।


5. निष्कर्ष: यथार्थवाद ही असली शक्ति है

मैकियावेली का यथार्थवाद हमें निराशावादी नहीं बनाता, बल्कि हमें सशक्त (Empowered) बनाता है। जब हम यह स्वीकार कर लेते हैं कि दुनिया वैसी नहीं है जैसी कहानियों में सुनाई जाती है, तब हम इसे बेहतर ढंग से नेविगेट करना सीखते हैं।

आदर्शवाद आपको एक सुंदर सपना दिखा सकता है, लेकिन यथार्थवाद आपको उस दुनिया में जीतना सिखाता है जहाँ आप वर्तमान में खड़े हैं।

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